दिल्ली चुनाव में आरोपों की आंधी, सवालों के बीच कौन सी पार्टी जनता का विश्वास जीत पाएगी?

एक सवाल मैं करूं, एक सवाल तुम करो... दिल्ली चुनाव में AAP Vs BJP की ये कैसी लड़ाई?

दिल्ली चुनाव में आरोपों की आंधी, सवालों के बीच कौन सी पार्टी जनता का विश्वास जीत पाएगी?

अजय कुमार,लखनऊ

दिल्ली विधानसभा चुनावों का माहौल इस बार कुछ खास है। आम आदमी पार्टी (आप), भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच तीखी सियासी लड़ाई जारी है। तीनों दल एक-दूसरे पर सवाल उठाने में लगे हैं, और इस बार यह सवालों का खेल इतनी जोरदार तरीके से सामने आ रहा है कि यह पुराने चुनावों से काफी अलग नजर आ रहा है। सवालों की बौछार के बीच यह सब कोई भी पार्टी जवाब देने की बजाय एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रखे हुए हैं। दिल्ली की सियासत में इस वक्त एक पुराना गीत याद आ रहा है, जिसे शैलेंद्र ने लिखा था"एक सवाल मैं करूं, एक सवाल तुम करो… और हर सवाल का जवाब भी सवाल हो!" इस गीत के बोल आज दिल्ली विधानसभा चुनाव के माहौल में बिल्कुल फिट बैठते हैं, क्योंकि चुनावी प्रचार के दौरान सभी दल एक-दूसरे से सवाल पूछते हुए आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन कोई भी दल इन सवालों का ठोस जवाब देने को तैयार नहीं है। 

अरविंद केजरीवाल के लिए यह चुनाव महत्वपूर्ण है क्योंकि वह नई दिल्ली विधानसभा सीट से अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे हैं। यह वही सीट है, जिसे उन्होंने पिछले तीन चुनावों में जीतकर अपनी सत्ता की मजबूत बुनियाद तैयार की थी। इस बार उनका मुकाबला बीजेपी के परवेश वर्मा और कांग्रेस के संदीप दीक्षित से है। दोनों ही प्रत्याशी इस बार केजरीवाल के सामने मजबूत चुनौती बनकर उभरे हैं। बीजेपी ने केजरीवाल के नामांकन पर सवाल उठाते हुए उनके हलफनामे में दी गई जानकारी पर संदेह जताया है। परवेश वर्मा ने यह आरोप लगाया कि केजरीवाल ने अपनी आय से संबंधित गलत जानकारी दी है और साथ ही एफआईआर की जानकारी छिपाई है। इसके अलावा, बीजेपी ने दिल्ली सरकार के योजनाओं के बारे में सवाल उठाए हैं, जिनसे दिल्ली के नागरिकों को राहत मिलती रही है। एक समय बीजेपी के नेता इन योजनाओं को 'रेबड़ी' कहा करते थे, लेकिन अब बीजेपी का कहना है कि अगर वे सत्ता में आए, तो वे दिल्ली सरकार की सभी योजनाओं को जारी रखेंगे। इस पर अरविंद केजरीवाल ने सवाल उठाया है कि अगर बीजेपी वही योजनाएं जारी रखने जा रही है, तो फिर जनता को किस पर भरोसा करना चाहिए, क्योंकि पहले वे इन्हें फ्री की योजनाएं कहते थे।

बीजेपी के आरोपों का जवाब देते हुए, अरविंद केजरीवाल ने कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बीजेपी से पूछा कि वह इन योजनाओं को लागू करने के लिए क्यों मजबूर हो रही है, जबकि पहले उन्होंने इन योजनाओं की आलोचना की थी। केजरीवाल ने बीजेपी पर यह भी आरोप लगाया कि वे सत्ता में आते ही दिल्ली की जनता से किए गए वादों से मुकर रहे हैं और वही योजनाएं अपनाने का दावा कर रहे हैं, जिनकी आलोचना उन्होंने पहले की थी। इसके अलावा, परवेश वर्मा ने दिल्ली सरकार की डीटीसी बसों की संख्या के बारे में सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह पूछा है कि पिछले दस सालों में दिल्ली सरकार ने कितनी नई बसें खरीदी हैं, खासकर महिलाओं के लिए स्पेशल बसों की संख्या में कितनी वृद्धि हुई है। यह सवाल दिल्ली सरकार की परिवहन नीति और उसकी कार्यक्षमता पर सवाल उठा रहा है, जो चुनावी मुद्दा बन चुका है।

अरविंद केजरीवाल ने केवल बीजेपी से ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि संघ प्रमुख मोहन भागवत से भी सवाल किए। उन्होंने मोहन भागवत को चिट्ठी लिखकर पूछा कि क्या संघ ने बीजेपी की उन गलतियों का समर्थन किया है, जिनकी वजह से चुनावी मैदान में उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, केजरीवाल ने बीजेपी पर चुनावी माहौल को बनाने के लिए पैसे, कंबल और जूते बांटने के आरोप लगाए। उनका कहना था कि बीजेपी लोकतंत्र के नाम पर चुनावी धांधली करने की कोशिश कर रही है, ताकि जनता को लुभाया जा सके।

दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी चुनावी रण में अपनी पूरी ताकत झोंकी है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने भी चुनावी अभियान में भाग लिया और दिल्ली के विकास पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि शीला दीक्षित के समय में जो विकास कार्य हुए, वे पिछले दस सालों में क्यों रुक गए? उन्होंने केजरीवाल से पूछा कि दिल्ली में विकास का पहिया क्यों थम गया है, जबकि दिल्ली की जनता ने उन्हें बार-बार वोट दिया। हालांकि, केजरीवाल ने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। कांग्रेस के प्रत्याशी संदीप दीक्षित ने भी बीजेपी और आप पर सवाल उठाए हैं, जिसमें उन्होंने शीश महल और शराब घोटाले के आरोप लगाए हैं, लेकिन आप पार्टी की तरफ से इसका कोई ठोस जवाब नहीं आया है। 

दिल्ली की सियासत में इन सवालों का खेल चुनावी माहौल को और भी गरमाए हुए है। सवालों के जवाब न मिलना यह संकेत देता है कि राजनीति में सत्ता हासिल करने की प्रक्रिया में आरोप-प्रत्यारोप की कोई सीमा नहीं होती। सभी दल अपनी-अपनी तरह से जनता के बीच अपनी साख बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जवाबी कार्रवाई के बजाय सवालों का सिलसिला जारी है। बीजेपी, कांग्रेस और आप के बीच सवालों का यह खेल दिल्ली विधानसभा चुनाव में यह दिखाता है कि सत्ता की राजनीति में सवाल और जवाब से ज्यादा अहम चीज वोट बैंक बन चुका है। जहां एक ओर सवालों की बौछार हो रही है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली के नागरिकों के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि कौन सही है और कौन गलत। इस चुनावी माहौल में आरोप-प्रत्यारोप का खेल जारी रहेगा, और दिल्ली की जनता 5 फरवरी को मतदान करके इन सवालों का जवाब देगी। आखिरकार, 8 फरवरी को चुनाव परिणाम सामने आएंगे, जो यह तय करेंगे कि दिल्ली की सत्ता पर किसका कब्जा होगा। इस चुनावी प्रक्रिया के दौरान, एक सवाल ही प्रमुख रहेगा कौन होगा दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री?

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